राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त पुण्य तिथि विशेष

आज ‘दद्दा’ मतलब राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पुुण्य तिथि है। हिंदी के महान कवि थे साथ ही वे हिंदी साहित्य के इतिहास में खड़ी बोली के प्रथम महत्वपूर्ण कवि थे। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के समय उनकी कृति भारत-भारती काफी प्रभावशाली रही, जिस कारण महात्मा गाँधी ने उन्हें राष्ट्रकवि की पदवी से सम्मानित किया। उनकी जयंती को 3 अगस्त को प्रतिवर्ष कवि दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 1954 में उन्हें पद्मभूषण सम्मान से नवाज़ा गया।

मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त 1886 में पिता सेठ रामचरण कनकने और माता काशी बाई के यहाँ उत्तर प्रदेश में झांसी के पास चिरगांव में हुआ। गुप्त अपने माता पिता की तीसरी संतान थे। १२ वर्ष की आयु में ब्रजभाषा में कनकलता नाम से कविता रचना आरम्भ किया। उनकी कवितायें खड़ी बोली में मासिक पत्रिका “सरस्वती” में प्रकाशित होना प्रारम्भ हो गई।

मैथिलीशरण गुप्त ने व्यकिगत आन्दोलन मे भी लिया था, जिस कारण उन्हे 16 अप्रैल 1941 को उन्हें गिरफ्तार किया गया, किन्तु आरोप सिद्ध न होने के कारण उन्हें 7 माह बाद छोड़ दिया गया था।

जयन्ती

मध्य प्रदेश के संस्कृति राज्य मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने कहा है कि राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती प्रदेश में प्रतिवर्ष तीन अगस्त को ‘कवि दिवस’ के रूप में व्यापक रूप से मनायी जायेगी। यह निर्णय राज्य शासन ने लिया है। युवा पीढ़ी भारतीय साहित्य के स्वर्णिम इतिहास से भली-भांति वाकिफ हो सके इस उद्देश्य से संस्कृति विभाग द्वारा प्रदेश में भारतीय कवियों पर केन्द्रित करते हुए अनेक आयोजन करेगा।


गुप्त जी को मिले प्रमुख सम्मान

हिन्दुस्तान अकादमी पुरस्कार (साकेत के लिए- ₹500) (1935)
मंगलाप्रसाद पुरस्कार (साकेत के लिए), हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा (1937)
साहित्यवाचस्पति (1946)
पद्मभूषण (1954)

प्रमुख कृतियां

महाकाव्य साकेत, यशोधरा

खण्डकाव्य जयद्रथ वध, भारत-भारती, पंचवटी, द्वापर, सिद्धराज, नहुष, अंजलि और अर्घ्य, अजित, अर्जन और विसर्जन, काबा और कर्बला, किसान, कुणाल गीत, गुरु तेग बहादुर, गुरुकुल , जय भारत, युद्ध, झंकार , पृथ्वीपुत्र, वक संहार, शकुंतला, विश्व वेदना, राजा प्रजा, विष्णुप्रिया, उर्मिला, लीला, प्रदक्षिणा, दिवोदास, भूमि-भाग

नाटक रंग में भंग , राजा-प्रजा, वन वैभव, विकट भट , विरहिणी , वैतालिक, शक्ति, सैरन्ध्री, स्वदेश संगीत, हिड़िम्बा , हिन्दू, चंद्रहास

फुटकर रचनाएँ केशों की कथा, स्वर्गसहोदर, ये दोनों मंगल घट (मैथिलीशरण गुप्त द्वारा लिखी पुस्तक) में संग्रहीत हैं।


अनूदित (मधुप के नाम से)-


संस्कृत स्वप्नवासवदत्ता, प्रतिमा, अभिषेक, अविमारक (भास) (गुप्त जी के नाटक देखें), रत्नावली (हर्षवर्धन)

बंगाली मेघनाथ वध, विहरिणी वज्रांगना (माइकल मधुसूदन दत्त), पलासी का युद्ध (नवीन चंद्र सेन)

फारसी रुबाइयात उमर खय्याम (उमर खय्याम) [घ]
काविताओं का संग्रह उच्छवास

पत्रों का संग्रह पत्रावली

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